जनपद बिजनौर में लोकगीतों का सांस्कृतिक एवं कलात्मक अनुशीलन (संस्कार गीतों के परिप्रेक्ष्य में)
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i6.103Keywords:
लोकगीत, संस्कार, धर्म, संगीत तथा कथाऐंAbstract
उत्तर प्रदेश राज्य के जनपद बिजनौर की विविधतापूर्ण एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में लोकगीतों का महत्वपूर्ण स्थान है। लोकगीत आज भी जनपद में पारिवारिक जीवन के अभिन्न अंग हैं। विशेष रूप से संस्कार गीत जिनके अंतर्गत गर्भाधान, जन्म, नामकरण, मुंडन, अन्नप्राशन, यज्ञोपवीत, विवाह तथा मृत्यु संस्कारों के अवसर पर गाए जाने वाले महत्वपूर्ण लोकगीत हैं। इनका उद्देश्य मात्र मनोरंजन न होकर सामाजिक जीवन की सांस्कृतिक चेतना, लोक विश्वास, नैतिक मूल्य तथा सामाजिक संबंधों को संरक्षण प्रदान करना है। जनपद में कलात्मकता की दृष्टि से संस्कार लोकगीतों मे भाषा की सरलता तथा लयात्मकता का प्रभावशाली रूप से प्रयोग मिलता है। वर्तमान समय में आधुनिकीकरण, बढ़ते नगरीयकरण तथा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण जनपद में लोकगीतों की परंपरा धीरे-धीरे अपने मूल स्वरूप को खोती जा रही है। नई पीढ़ी का लोक परंपराओं की प्रति जुड़ाव कम हो रहा है। अतः आवश्यकता है कि जनपद की इस धरोहर को संरक्षण मिले जिससे जनपद की सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान जीवित रहे। यही प्रस्तुत शोध पत्र का मूल उद्देश्य है।


