नगरीकरण का ग्रामीण पर्यावरण के सामाजिक-आर्थिक परिवेश पर प्रभाव : एक शोधात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i6.108Keywords:
नगरीकरण, ग्रामीण पर्यावरण, भूमि-उपयोग परिवर्तन, कृषि आजीविका, लखनऊAbstract
बढ़ते नगरीकरण ने भारतीय नगरों की परिधि पर बसे ग्रामीण एवं उपनगरीय क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे तथा पर्यावरण को गहराई से प्रभावित किया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य लखनऊ महानगर के नगरीय विस्तार तथा उसके ग्रामीण-पर्यावरणीय एवं आजीविका-सम्बन्धी परिणामों का मूल्यांकन करना है। अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित विश्लेषणात्मक अभिकल्प अपनाता है, जिसमें जनगणना, उपग्रह-आधारित भूमि-उपयोग अध्ययनों तथा शासकीय रिपोर्टों का प्रवृत्ति एवं वर्णनात्मक सांख्यिकीय विश्लेषण किया गया। परिकल्पना यह थी कि नगरीय विस्तार से कृषि भूमि, आजीविका तथा जल-पर्यावरण की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। परिणाम दर्शाते हैं कि 1991 से 2021 के बीच लखनऊ का निर्मित क्षेत्र 53.86 वर्ग किमी से बढ़कर 261.45 वर्ग किमी हो गया, गोमती नदी में घुलित ऑक्सीजन घटकर 0.9 मिग्रा/ली रह गई तथा भूजल स्तर प्रतिवर्ष 0.5–1.0 मीटर गिरा। दोनों परिकल्पनाएँ समर्थित पाई गईं। निष्कर्षतः, नियोजनहीन नगरीकरण ने ग्रामीण-पर्यावरण एवं कृषक आजीविका दोनों पर दबाव बढ़ाया है, जिसके लिए संतुलित एवं समावेशी नियोजन आवश्यक है।


