सतत् जीवन और समग्र कल्याण के लिए योग: दैनिक जीवन में स्वास्थ्य एवं संतुलन

Authors

  • अमरजीत कौर शोध छात्रा, शारीरिक शिक्षा, खेल और योग विज्ञान विभाग, सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बारी, झुंझुनू (राजस्थान), भारत Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i9.128

Keywords:

योग 365, समग्र कल्याण, सतत जीवन, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, सचेत उपभोग, कल्याण, पर्यावरण के लिए जीवन-शैली ।

Abstract

योग, वैश्विक स्वास्थ्य, कल्याण और सतत जीवन के क्षेत्र में भारत का सबसे मूल्यवान योगदान है। पिछले एक दशक में, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन से बढ़कर एक विश्वव्यापी आंदोलन बन गया है, जो शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देता है। केवल वार्षिक समारोहों तक सीमित न रहने की आवश्यकता को पहचानते हुए, आयुष मंत्रालय ने 'योग 365' पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य नागरिकों को योग को अपनी रोज़मर्रा की आदत बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस पहल का लक्ष्य घरों, स्कूलों, कार्यस्थलों, समुदायों और डिजिटल मंचों में योग को शामिल करके, योग के प्रति जागरूकता और उसके नियमित अभ्यास के बीच की खाई को पाटना है। यह शोध-पत्र 'योग 365' की अवधारणा, समग्र कल्याण को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका और सतत जीवन-शैली में इसके योगदान की पड़ताल करता है। सरकारी रिपोर्टों, राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के निष्कर्षों, नीतिगत पहलों और कल्याण तथा पर्यावरणीय स्थिरता पर समकालीन चर्चाओं के आधार पर, यह अध्ययन इस बात की पड़ताल करता है कि योग किस प्रकार निवारक स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक दृढ़ता, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सचेत उपभोग को बढ़ावा देता है। यह लेख तर्क देता है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम की एक प्रणाली नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक समग्र तरीका है, जो संतुलन, संयम, आत्म-अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य को प्रोत्साहित करता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि 'योग 365' में जन-स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने, जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों को कम करने, पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने और समग्र तथा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।

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Published

2026-09-15

How to Cite

सतत् जीवन और समग्र कल्याण के लिए योग: दैनिक जीवन में स्वास्थ्य एवं संतुलन. (2026). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 2(9), 56-62. https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i9.128
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