आधुनिक हिंदी कहानी में हाशिए का पुरुष: एक विमर्श

Authors

  • श्री हेमंत शाक्य सहायक प्राध्यापक (हिंदी साहित्य), शासकीय महाविद्यालय पृथ्वीपुर, निवाड़ी, म.प्र. Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i1.24

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र आधुनिक हिंदी कथा साहित्य में हाशिए पर स्थित पुरुष पात्रों की स्थिति, अस्मिता और संघर्ष का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन दस प्रमुख रचनाओं के तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से पुरुष विमर्श के विभिन्न आयामों को उजागर करता है। शोध में फणीश्वरनाथ रेणु, कमलेश्वर, कृष्णा सोबती, भीष्म साहनी, श्रीलाल शुक्ल, सुरेंद्र वर्मा, ममता कालिया और शेखर जोशी की रचनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि पुरुष पात्र केवल पारंपरिक पितृसत्ता या मध्यवर्गीय भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दबावों के कारण हाशिए पर भी स्थित होते हैं। शोध में Raewyn Connell के Hegemonic Masculinity के सिद्धांत तथा Subaltern और Marginalized Masculinity की अवधारणाओं का उपयोग किया गया है। गुणात्मक साहित्यिक विश्लेषण, तुलनात्मक अध्ययन और संदर्भात्मक विश्लेषण पद्धति के माध्यम से यह शोध दर्शाता है कि हाशिए का लेखन संपूर्ण रूप से मनुष्यता का लेखन है जो सभी प्रकार के शोषण का अंत चाहता है। अध्ययन भारतीय समाज में जाति, वर्ग, पितृसत्ता और ब्राह्मणवादी व्यवस्था के प्रभाव को भी रेखांकित करता है तथा समतामूलक समाज की स्थापना की आवश्यकता पर बल देता है।

मुख्य शब्द: हाशिए का पुरुष, पुरुष विमर्श, आधुनिक हिंदी कहानी, सामाजिक दबाव, अस्मिता संकट, जाति व्यवस्था, पितृसत्ता, दलित विमर्श, आदिवासी विस्थापन

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Published

2026-01-29

How to Cite

आधुनिक हिंदी कहानी में हाशिए का पुरुष: एक विमर्श. (2026). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 2(1), 01-09. https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i1.24
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