ए.आई. युग में कार्य, कौशल और असमानता: सहकारी मॉडल की प्रासंगिकता का समाजशास्त्रीय अध्ययन

Authors

  • डॉ. योगेंद्र नाथ श्रीवास्तव सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i4.54

Keywords:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव–ए.आई. सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कौशल विकास, श्रम-बाज़ार परिवर्तन, आर्थिक असमानता, भविष्य का कार्य।.

Abstract

वर्तमान शताब्दी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) तकनीक विश्व अर्थव्यवस्था और श्रम-बाज़ार को जिस तीव्रता से रूपांतरित कर रही है, वह अभूतपूर्व है। कार्य की पारंपरिक अवधारणाएँ, रोजगार के ढाँचे, उद्योगों की संरचना तथा कौशल की मांग—सभी नए आयाम ग्रहण कर रहे हैं। यह शोध-पत्र ए.आई. आधारित स्वचालन, मानव-ए.आई. सहयोग, कौशल आवश्यकताओं, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास, तथा सहकारी रोजगार मॉडलों के उभार के बीच संबंधों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में विश्व आर्थिक मंच, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, एरिक ब्रिन्जॉल्फ़सन, एंड्रयू मैकाफी, शोषाना जुबॉफ़, जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ तथा प्लेटफ़ॉर्म कोऑपरेटिविज़्म के सिद्धांतकार ट्रेबोर स्कॉल्ज़ जैसे प्रमाणित विचारकों के स्थापित सिद्धांतों एवं निष्कर्षों का उपयोग करते हुए भविष्य के कार्य की दिशा का विस्तृत विवेचन किया गया है। शोध यह सिद्ध करता है कि ए.आई. जहाँ उत्पादकता को बढ़ाता है, वहीं यह नए जोखिम—जैसे नौकरी असुरक्षा, कौशल-अंतराल, डेटा नियंत्रण तथा आर्थिक असमानता—भी उत्पन्न करता है। इन चुनौतियों के समाधान में सहकारी रोजगार मॉडल एक प्रभावी विकल्प प्रस्तुत करते हैं, क्योंकि वे श्रमिकों को स्वामित्व, निर्णय-अधिकार और पारदर्शिता प्रदान करते हुए कार्य-स्थलों को अधिक न्यायपूर्ण एवं मानव-केंद्रित बनाते हैं।

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Published

2026-04-29

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ए.आई. युग में कार्य, कौशल और असमानता: सहकारी मॉडल की प्रासंगिकता का समाजशास्त्रीय अध्ययन. (2026). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 2(4), 25-32. https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i4.54
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