जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता और चुनौतियाँ: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य

Authors

  • डॉ. रमणीक श्रीवास्तव भूगोल विभाग, राम स्वरूप ग्राम उद्योग (पी.जी.) महाविद्यालय, पुखरायाँ, कानपुर देहात। Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijhce.v1i3.11

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र वैश्विक तथा भारतीय संदर्भ में जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता और उससे जुड़ी चुनौतियों का भौगोलिक दृष्टि से गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें यह दर्शाया गया है कि जैव विविधता न केवल पारिस्थितिक संतुलन, खाद्य सुरक्षा और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक ज्ञान और सतत विकास के लिए भी आधारशिला है। शोध में संरक्षण के कारणों, वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय असमानताओं पर विशेष ध्यान दिया गया है—जैसे अमेज़न वर्षावन, अफ्रीका के सवाना, हिमालयी क्षेत्र और भारतीय पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले जैव संसाधनों की विशिष्टताएँ और उन पर बढ़ते मानवीय दबाव। इसमें यह भी विश्लेषित किया गया है कि शहरीकरण, औद्योगीकरण, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, और आक्रामक प्रजातियों के प्रसार जैसी गतिविधियाँ जैव विविधता संरक्षण के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही हैं।

भू-स्थानिक (geospatial) दृष्टिकोण से, यह शोध-पत्र संरक्षण की मौजूदा नीतियों व कार्यक्रमों (जैसे संरक्षित क्षेत्र, बायोस्फीयर रिज़र्व, राष्ट्रीय उद्यान, सामुदायिक आधारित संरक्षण) और अंतरराष्ट्रीय समझौतों (जैसे जैव विविधता संधि, Aichi लक्ष्य) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करता है। GIS और रिमोट सेंसिंग जैसे आधुनिक भूगोलिक उपकरणों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है, जो संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और नीति-निर्माण में सहायक हैं। अंततः, यह शोध-पत्र यह रेखांकित करता है कि जैव विविधता संरक्षण के लिए केवल वैज्ञानिक और नीतिगत पहल पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता, शिक्षा और वैश्विक-स्थानीय सहयोग की भी समान रूप से आवश्यकता है।

मुख्य शब्द (Keywords): जैव विविधता (Biodiversity), संरक्षण (Conservation), हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots), स्थानिक असमानता (Spatial Inequality), पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ (Ecosystem Services)

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Published

2025-11-30

How to Cite

जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता और चुनौतियाँ: भौगोलिक परिप्रेक्ष्य. (2025). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 1(3), 01-07. https://doi.org/10.59828/ijhce.v1i3.11
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