आचार्य पद्माकर के काव्य में निरूपित तत्कालीन लोकविश्वास एवम् मान्यताए

Authors

  • डाॅ0 अल्पना सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, एस.बी.डी.पी.जी.काॅलेज, धामपुर, बिजनौर Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i7.114

Abstract

किसी भी देश की पहचान उसकी सभ्यता और संस्कृति से होती है। वैश्विक स्तर पर उसकी यही विशिष्टताएं उसे परस्पर एक दूसरे से अलग बनाती है। भारतीय संस्कृति विश्व भर में अपनी अलग स्थानीय विशेषताओं के कारण जानी-पहचानी जाती है। चूँकि किसी भी देश का साहित्य वहां की संस्कृति को संरक्षित करने के साथ ही प्रचारित और प्रसारित भी करने का अच्छा माध्यम होता है अतः यह आवश्यक है कि विविध काल के साहित्य का सांस्कृतिक दृष्टि से अनुशीलन किया जाए तथा शोध-दृष्टि से उसका मूल्यांकन किया जाए। प्रस्तुत शोध-पत्र का मूल उद्देश्य रीतिकाल और तत्कालीन कवि आचार्य पद्माकर के काव्य में निरुपित भारतीय संस्कृति के मूल तत्त्वों, लोकविश्वासों और मान्यताओं का सूक्ष्मता से अवलोकन करना के साथ ही वर्तमान समय में तद्युगीन साहित्य के पुर्नपाठ के द्वारा उसकी प्रासंगिकता को सिद्ध करने का प्रयास करना है।

मुख्य शब्द: भारतीय संस्कृति, रीतिकाल, आचार्य पद्माकर, लोकविश्वास और मान्यताएं।

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Published

2026-07-23

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आचार्य पद्माकर के काव्य में निरूपित तत्कालीन लोकविश्वास एवम् मान्यताए. (2026). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 2(7), 25-28. https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i7.114
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