शिक्षक शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित वैयक्तिकृत अधिगम का उभरता प्रतिमान: नीतिगत, शैक्षणिक एवं नैतिक परिप्रेक्ष्य
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i7.116Keywords:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैयक्तिकृत अधिगम, शिक्षक शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल शिक्षा, AI Ethics, Learning AnalyticsAbstract
इक्कीसवीं शताब्दी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence—AI) ने शिक्षा के स्वरूप, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं तथा शैक्षिक प्रशासन में व्यापक परिवर्तन की संभावनाएँ उत्पन्न की हैं। विशेष रूप से शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में AI आधारित वैयक्तिकृत अधिगम (Personalized Learning) एक उभरते हुए प्रतिमान के रूप में विकसित हो रहा है, जो प्रत्येक शिक्षार्थी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं, अधिगम गति, रुचियों तथा दक्षताओं के अनुरूप शिक्षण अनुभव प्रदान करने का प्रयास करता है। पारंपरिक शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम प्रायः एकरूप (One-size-fits-all) दृष्टिकोण पर आधारित रहे हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियाँ डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, लर्निंग एनालिटिक्स तथा अनुकूली (Adaptive) शिक्षण तकनीकों के माध्यम से प्रत्येक शिक्षार्थी के लिए व्यक्तिगत अधिगम पथ (Individual Learning Path) विकसित करने में सक्षम हैं।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य शिक्षक शिक्षा में AI आधारित वैयक्तिकृत अधिगम की अवधारणा, उसके नीतिगत आधार, शैक्षणिक उपयोगिता तथा नैतिक चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन गुणात्मक, वर्णनात्मक एवं दस्तावेज़ीय अनुसंधान पद्धति पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, UNESCO, OECD, NITI Aayog, शिक्षा मंत्रालय, UGC तथा अन्य प्रामाणिक स्रोतों का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि AI आधारित वैयक्तिकृत अधिगम शिक्षक शिक्षा में अधिगम की गुणवत्ता, शिक्षक दक्षताओं, स्व-अधिगम, सतत् मूल्यांकन तथा व्यावसायिक विकास को नई दिशा प्रदान कर सकता है। इसके साथ ही यह भी पाया गया कि AI का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब डिजिटल अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण, डेटा सुरक्षा, डिजिटल नैतिकता तथा भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधनों का पर्याप्त विकास किया जाए।
शोध का निष्कर्ष यह है कि AI शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी व्यावसायिक क्षमता को सशक्त बनाने वाला एक बुद्धिमान सहयोगी (Intelligent Teaching Assistant) है। भविष्य की शिक्षक शिक्षा में मानव-केंद्रित (Human-Centred) एवं नैतिक AI का समावेश ही सतत् एवं समावेशी शैक्षिक विकास का आधार बनेगा।


