ग्रामीण समुदाय में वैकल्पिक चिकित्सा परम्परा
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i9.129Keywords:
वैकल्पिक चिकित्सा, ग्रामीण समुदाय, लोक चिकित्सा, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक विश्वासAbstract
वैकल्पिक चिकित्सा से आशय उन उपचार पद्धतियों से है, जिनका उपयोग आधुनिक चिकित्सा के अतिरिक्त या कभी-कभी उसके स्थान पर स्वास्थ्य बनाए रखने और बीमारी से राहत पाने के लिए किया जाता है। इसमें यूनानी होम्योपैथी सिद्धा,आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी-बूटी आधारित उपचार, घरेलू उपचार और विभिन्न लोक-चिकित्सा पद्धतियाँ शामिल हैं। ग्रामीण समुदाय में इन उपचार पद्धतियों का संबंध केवल बीमारी के इलाज से नहीं, बल्कि परिवार से मिले ज्ञान, स्थानीय अनुभव, सामाजिक विश्वास और सांस्कृतिक परम्पराओं से भी जुड़ा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा में विभिन्न संस्कृतियों से विकसित ज्ञान, कौशल और उपचार संबंधी प्रथाएँ शामिल हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य को बनाए रखने और बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिए किया जाता रहा है। समाजशास्त्री मैक्स वेबर की सामाजिक क्रिया की अवधारणा के आधार पर देखा जाए तो किसी व्यक्ति द्वारा विशेष उपचार पद्धति को अपनाना उसके विश्वास, अनुभव और उस व्यवहार से जुड़े सामाजिक अर्थों से प्रभावित होता है। इसी दृष्टिकोण से यह अध्ययन ग्रामीण समुदाय में वैकल्पिक चिकित्सा परम्पराओं के स्वरूप, उपयोग और सामाजिक आधार को समझने का प्रयास करता है।
यह अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित वर्णनात्मक एवं गुणात्मक अध्ययन है। इसके लिए पुस्तकों, शोध-पत्रों, शोध-प्रबंधों, सरकारी रिपोर्टों, WHO, आयुष मंत्रालय(आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) तथा अन्य विश्वसनीय प्रकाशित स्रोतों का अध्ययन और विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया है कि परिवार, समुदाय, आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक विश्वास वैकल्पिक चिकित्सा के उपयोग को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। साथ ही, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के बढ़ते प्रभाव के बीच इन परम्पराओं की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों तथा इनके संरक्षण और विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है।


