स्थानीय शासन में सहकारी समितियों के योगदान का अध्ययन

Authors

  • सरिता भारती शोध छात्रा-हिन्दी, वी॰ एस॰ एस॰ डी॰ पी॰ जी॰ कालेज कानपुर Author
  • डॉ. विनोद कुमार सहायक प्रोफेसर, वाणिज्य, राजकीय महाविद्यालय हंसौर बाराबंकी Author

DOI:

https://doi.org/10.59828/xt3bhy51

Abstract

स्थानीय शासन  में सहकारी समितियों की भूमिका ग्रामीण और शहरी विकास को सशक्त बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सहकारी समितियां स्वेच्छा से जुड़े व्यक्तियों का एक ऐसा संघ है, जो अपने पारस्परिक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करते हैं। स्थानीय शासन, विशेषकर ग्रामीण स्तर पर, सहकारी समितियां पंचायती राज संस्थाओं की सहायक के रूप में काम करती हैं और 'सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करती हैं। यह अध्ययन भारत में सहकारी आंदोलन, विशेषकर पंचायती राज संस्थाओं  के साथ उनके अभिसरण  के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। स्थानीय शासन में सहकारी समितियों का प्रमुख योगदान जैसे आर्थिक समावेश, ग्रामीण विपणन और प्रसंस्करण, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचनात्मक विकास, स्थानीय शासन को मजबूती तथा प्रमुख उपलब्धियाँ जैसे डेयरी सहकारिता, डिजिटल पैक्स, बहुउद्देशीय समितियां तथा  चुनौतियां और बाधाएं जिसमे सीमित कार्यशील पूंजी, राजनीतिक हस्तक्षेप, जागरूकता का अभाव, तकनीकी पिछड़ापनआधुनिकीकरण की गति धीमी होना, आदि का अध्ययन करता है जबकि इन्हें और प्रभावी बनाने के लिए स्वायत्तता, पेशेवर प्रबंधन, और डिजिटलीकरण की आवश्यक है यह अवधारणा जिम्मेदारियों और संसाधनों के बंटवारे और उन नीतियों और कार्यक्रमों के  सहयोग पर जोर देता है 

मुख्य शब्द- स्थानीय शासन, सहकारी समितियों की उपलब्धियाँ, चुनौतियां और निष्कर्ष।.

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Published

2026-05-15

How to Cite

स्थानीय शासन में सहकारी समितियों के योगदान का अध्ययन. (2026). International Journal of Humanities, Commerce and Education, 2(5), 14-19. https://doi.org/10.59828/xt3bhy51
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