भूगोल में भूमण्डलीय स्थितीय प्रणाली (जी॰पी॰एस॰) की उपयोगिताः चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

लेखक

  • डाॅ0 हिमानी असि0प्रो0 (भूगोल विभाग), जे0वी0 जैन काॅलेज, सहारनपुर ##default.groups.name.author##
  • डाॅ0 पंकज कुमार असि0प्रो0 (भूगोल विभाग), जे0वी0 जैन काॅलेज, सहारनपुर ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i6.101

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जी॰पी॰एस॰ स्थनिक विश्लेषण, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, नेविगेशन

सार

आधुनिक भूगोल की एक अनिर्वाय तकनीक बन चुकी भूमण्डलीय स्थितीय प्रणाली, जिसने आज स्थानिक आँकड़ों के संग्रहण, विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण को अत्यन्त ही सटीकता से उपयोग करना संभव बना दिया है। यह आधुनिक भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसके द्वारा भूगोल के अध्ययन अनुसंधान और संसाधन प्रबन्धन आदि के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन ला दिये है। यह एक उपग्रह आधारित नेविगेशन तकनीक है जो पृथ्वी के किसी भी स्थान के सटीक समय, स्थिति, ऊँचाई तथा मार्ग निर्देशन सम्बन्धी जानकारी उपलब्ध कराती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का मूल उद्देश्य जी॰पी॰एस॰ की आधारभूत संकल्पना, कार्य प्रणाली एवं विभिन्न उपयोगों के विश्लेषण के साथ-साथ इसकी सीमाओं, चुनोतियों तथा भाविष्य की सम्भावनाओं का वर्णन करना है।

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प्रकाशित

2026-06-29

अंक

खंड

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