भारतीय महिलाओं की सामाजिक स्थिति में ऐतिहासिक परिवर्तन: प्राचीन से आधुनिक काल तक

लेखक

  • डॉ. चंदन कुमार पीएच.डी. (इतिहास), एम.बी.ए. (मानव संसाधन एवं सूचना प्रौद्योगिकी), स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ (भारत) ##default.groups.name.author##

सार

भारतीय महिलाओं की सामाजिक स्थिति का इतिहास प्राचीन काल से आधुनिक काल तक निरंतर परिवर्तन की प्रक्रिया को दर्शाता है। प्राचीन भारत में महिलाओं को धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जीवन में सम्मानजनक स्थान प्राप्त था, किंतु उनकी स्वतंत्रता और अधिकार सामाजिक एवं धार्मिक मर्यादाओं से सीमित थे। शिक्षा, विवाह और श्रम में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी, परंतु निर्णय की स्वतंत्रता प्रायः पुरुष-प्रधान संरचना के अधीन रही। मध्यकालीन भारत में राजनीतिक अस्थिरता, सामंती व्यवस्था और कुछ कुरीतियों के प्रभाव से महिलाओं की स्थिति में संकुचन आया, हालांकि इस काल में भी कुछ महिलाएँ राजनीतिक नेतृत्व, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। आधुनिक काल में औद्योगीकरण, शिक्षा के प्रसार, संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी सुधारों ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन किया। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया तथा राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व के नए अवसर प्रदान किए। स्वास्थ्य, पोषण, मातृत्व सुरक्षा और उद्यमिता से संबंधित नीतियों ने उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दिया। यद्यपि आज भी लैंगिक भेदभाव, सामाजिक रूढ़ियाँ और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, फिर भी समकालीन भारत में महिलाएँ सशक्तिकरण, समानता और आत्मसम्मान की दिशा में निरंतर अग्रसर हैं। इस प्रकार, महिलाओं की सामाजिक स्थिति में हुआ ऐतिहासिक परिवर्तन भारतीय समाज के समग्र विकास और सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण संकेतक है।

मुख्य शब्द: भारतीय महिलाएँ, सामाजिक स्थिति, ऐतिहासिक परिवर्तन, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और अधिकार, आर्थिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता ।

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प्रकाशित

2025-11-30

अंक

खंड

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