भारत में सामन्तवाद

लेखक

  • फूलचन्द शोधार्थी (प्राचीन इतिहास), बयालसी पी0जी0 कालेज जलालपुर, जौनपुर, उ0प्र0 ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i3.42

सार

सामंतवाद, (फ्यूडलिज्म) शब्द यूरोपीय समाज में मौजूद एक धारणा का नाम है। जिसमें, भूस्वामी के भूमि सम्बन्धी अधिकारों को दासों या किसानों के अधिशेष पर पलने वाले परिजीवी के रूप में माना जाता है। फ्यूडलिज्म लैटिन शब्द फ्यूडम से व्युत्पन्न हुआ है। जिसका अंगे्रजी अपुवाद फीफ (थ्प्म्थ्द्ध होता है। सामंतवाद एक ऐसी प्रक्रिया हैं जिसके जरिये भू-राजस्व की उगाही एवं सेना के पालन समेत सारे प्रशासनिक अधिकार वंशानुगत् भूमि धारियों (सामंत) के एक निकाय को अधिकाधिक प्रत्यायोजित किया जाता था। भारतीय सामंतवाद यूरोपीय सामंतवाद से इस अर्थ में भिन्न था कि भारतीय सामंतवाद में कृषि दासता(सर्फडम) एवं मेनर व्यवस्था का अभाव दिखता है। यही कारण है कि भारतीय सामंतवाद को अर्द्ध सामंती कहा गया है।

मुख्य शब्द- सामंतवाद, (फ्यूडलिज्म), कृषि दासता(सर्फडम), कुलीन वर्ग, नौकरशाही, माक्र्सवाद, विकेन्द्रीकरण।

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प्रकाशित

2026-03-29

अंक

खंड

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