कौटिल्य का मण्डल सिद्धान्त एवं विकसित भारत @2047 हेतु भारत की रणनीतिक रूपरेखा: संयुक्त राष्ट्र से परे वैश्विक संघर्ष प्रबन्धन का पुनर्विचार

लेखक

  • Shivam Singh Gaur Research Scholar, Defence and Strategic Studies, P.P.N. (P.G.) College, Kanpur Chhatrapati Shahuji Maharaj University, Kanpur, U.P. 208024 ##default.groups.name.author##
  • Dr. D.C. Katiyar Professor & Head, Department of Defence & Strategic Studies, P.P.N. (P.G.) College, Kanpur ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.59828/ijhce.v2i5.64

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मण्डल सिद्धान्त (Mandala Theory), कौटिल्य / चाणक्य (Kautilya / Chanakya), भारतीय विदेश नीति (Indian Foreign Policy), संयुक्त राष्ट्र (United Nations), वैश्विक संघर्ष प्रबन्धन (Global Conflict Management), विश्वगुरु (Vishwaguru).

सार

यह शोध-पत्र 21वीं सदी के जटिल वैश्विक संघर्षों के संदर्भ में पारंपरिक एवं समकालीन संघर्ष-प्रबंधन तंत्रों का पुनर्मूल्यांकन करता है। इसमें संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था तथा उदार संस्थागत ढांचे की सीमाओं को रेखांकित करते हुए, कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रतिपादित मण्डल सिद्धांत को एक यथार्थवादी विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो शक्ति-संतुलन, रणनीतिक हितों एवं गतिशील पड़ोसी संबंधों पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र की शांति-स्थापन प्रणाली वीटो शक्ति के कारण अक्सर निष्क्रिय हो जाती है। सीरिया, यूक्रेन और गाजा जैसे संघर्षों में स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो का प्रयोग गंभीर मानवीय संकटों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई को बाधित करता है, जिससे इसकी संरचनात्मक कमजोरियाँ उजागर होती हैं।

कौटिल्य का मण्डल सिद्धांत राज्यों के संबंधों को शत्रु, मित्र एवं अन्य श्रेणियों में विभाजित करते हुए स्वार्थ-आधारित, लचीले गठबंधनों पर बल देता है। साथ ही षाड्गुण्य नीति—साम, दाम, दण्ड, भेद, संधि और विग्रह—व्यावहारिक एवं परिस्थिति-आधारित कूटनीति को प्रोत्साहित करती है, जो कठोर बहुपक्षवाद की अपेक्षा अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकती है। ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण में भारत ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’ और इंडो-पैसिफिक जैसी पहलों के माध्यम से यथार्थवाद एवं बहुपक्षवाद का समन्वय कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में प्रमुख योगदान तथा क्वाड, एससीओ और ब्रिक्स में सक्रिय भागीदारी भारत को ‘विश्व मित्र’ के रूप में स्थापित करती है।

अतः प्राचीन भारतीय यथार्थवाद और आधुनिक संस्थागत ढांचे के समन्वय पर आधारित एक हाइब्रिड मॉडल वैश्विक शांति, स्थिरता एवं प्रभावी शासन के लिए अधिक उपयुक्त मार्ग प्रस्तुत करता है।

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प्रकाशित

2026-05-15
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