भौगोलिक संकेतक एवं स्टार्टअप्स का मखाना कृषि पर प्रभाव: बिहार के दरभंगा जिला के संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.59828/ijhce.v1i2.7Abstract
यह शोध पत्र बिहार के बिहार के दरभंगा जिले के विशेष संदर्भ में मखाना (Euryale ferox) की कृषि, प्रसंस्करण तथा विपणन प्रणालियों पर भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication - GI Tag) एवं कृषि-तकनीक नवउद्यमों (Agri-tech Startups) के परिवर्तनकारी प्रभावों का एक विस्तृत और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। मखाना जिसे वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' तथा स्थानीय रूप से ब्लैक् डायमंड अथवा 'मिथिला का मखान' कहा जाता है, सदियों से मिथिलांचल की सांस्कृतिक व आर्थिक अस्मिता का केंद्र रहा है। अगस्त 2022 में मिथिला मखाना को जीआई टैग प्रदान किए जाने की ऐतिहासिक घटना और विगत दशक में शक्ति सुधा, मिथिला नेचुरल्स जैसे स्टार्टअप्स के उदय ने इस पारंपरिक, असंगठित क्षेत्र को एक आधुनिक, निर्यात-उन्मुख कृषि उद्योग में परिवर्तित कर दिया है।
यह अध्ययन प्राथमिक और द्वितीयक आंकड़ों (2018-2025) के आधार पर यह प्रदर्शित करता है कि कैसे जीआई टैग ने उत्पाद की ब्रांड इक्विटी को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है, जिससे मूल्य प्राप्ति (Price Realization) में 200ः से अधिक की वृद्धि हुई है। साथ ही, स्टार्टअप्स ने आपूर्ति श्रृंखला से मध्यस्थों अथवा बिचैलियों की लंबी कतार को हटाकर श्खेत से सीधे बाजार (Farm-to-Fork) मॉडल को लागू किया है। यह शोध पत्र दरभंगा के मखाना कृषि से संबंधित समुदाय की सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण रोजगार पर पड़े सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करते हुए भविष्य की चुनौतियों एवं संभावनाओं का एक रोडमैप प्रस्तुत करता है।
मूलशब्द: भौगोलिक संकेतक, नवउद्यम, मखाना कृषि, ब्लैक डायमंड,यूरेल फेरोक्स


